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पुरी से झारखंड तक गूंजा जय जगन्नाथ का जयघोष, रथयात्रा में उमड़ा आस्था का सैलाब

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Jharkhand Life News पुरी/रांची/देवघर: भगवान जगन्नाथ की विश्वप्रसिद्ध रथयात्रा इस वर्ष भी देशभर में श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ मनाई गई। ओडिशा के पुरी से लेकर झारखंड के रांची, जमशेदपुर, देवघर, धनबाद, बोकारो और कई अन्य शहरों तक लाखों श्रद्धालु भगवान जगन्नाथ, बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के दर्शन के लिए उमड़े। जगह-जगह “जय जगन्नाथ” के जयघोष, भजन-कीर्तन और धार्मिक आयोजनों से पूरा माहौल भक्तिमय हो गया।

पुरी में श्रीजगन्नाथ मंदिर से निकली भव्य रथयात्रा में देश-विदेश से आए लाखों श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया। भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा के विशाल रथों को श्रद्धालुओं ने रस्सियों से खींचकर अपनी आस्था प्रकट की। यात्रा के दौरान सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे। पुलिस, चिकित्सा दल, स्वयंसेवकों और प्रशासन ने भीड़ प्रबंधन, यातायात और श्रद्धालुओं की सुविधाओं पर विशेष ध्यान दिया, जिससे पूरा आयोजन शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ।

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झारखंड में भी रथयात्रा को लेकर जबरदस्त उत्साह देखने को मिला। रांची, जमशेदपुर, देवघर, धनबाद, बोकारो, हजारीबाग और अन्य शहरों में भगवान जगन्नाथ की शोभायात्रा धूमधाम से निकाली गई। रंग-बिरंगी झांकियों, पारंपरिक वाद्ययंत्रों, भजन मंडलियों और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने श्रद्धालुओं को आकर्षित किया। बड़ी संख्या में महिलाएं, युवा, बच्चे और बुजुर्ग रथयात्रा में शामिल हुए और भगवान का रथ खींचकर सुख, शांति और समृद्धि की कामना की।

कई स्थानों पर श्रद्धालुओं के लिए पेयजल, शरबत, प्रसाद, चिकित्सा शिविर और विश्राम केंद्र बनाए गए। सामाजिक और धार्मिक संगठनों के स्वयंसेवकों ने पूरे आयोजन के दौरान सेवा कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाई। इससे रथयात्रा केवल धार्मिक आयोजन तक सीमित नहीं रही, बल्कि सेवा, सहयोग और सामाजिक समरसता का भी संदेश देती नजर आई।

धार्मिक मान्यता के अनुसार रथयात्रा के दौरान भगवान जगन्नाथ अपने भक्तों के बीच स्वयं आते हैं। इसी वजह से इस पर्व का विशेष महत्व माना जाता है और रथ के दर्शन या रथ खींचने को अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है। हर वर्ष लाखों श्रद्धालु इस दिव्य अवसर का इंतजार करते हैं।

रथयात्रा भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिक विरासत और सामाजिक एकता का एक जीवंत प्रतीक है। पुरी से लेकर झारखंड तक उमड़ी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि भगवान जगन्नाथ के प्रति लोगों की आस्था आज भी उतनी ही गहरी और अटूट है।

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