Jharkhand Life News नई दिल्ली: देशभर में लागू किए गए E20 पेट्रोल (20% इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल) को लेकर बहस लगातार तेज होती जा रही है। इस बीच आम आदमी पार्टी (AAP) ने E20 पेट्रोल को अनिवार्य बनाए जाने का विरोध करते हुए सरकार से लोगों को अपनी पसंद का ईंधन चुनने का विकल्प देने की मांग की है। इसके लिए पार्टी ने एक ऑनलाइन जन-अभियान भी शुरू किया है।
विवाद के बीच छत्तीसगढ़ से एक महत्वपूर्ण मामला भी सामने आया है। रायपुर जिला उपभोक्ता आयोग ने एक वाहन मालिक की शिकायत पर फैसला सुनाते हुए वाहन निर्माता और डीलर को मरम्मत खर्च और मुआवजा देने का आदेश दिया है। शिकायतकर्ता का आरोप था कि E20 पेट्रोल के इस्तेमाल के बाद उसकी गाड़ी में बार-बार तकनीकी समस्याएं आने लगी थीं। हालांकि कंपनी ने इन आरोपों से इनकार किया, लेकिन आयोग ने उपभोक्ता के पक्ष में फैसला सुनाया।
दूसरी ओर, केंद्र सरकार लगातार यह कह रही है कि E20 पेट्रोल सुरक्षित है और इससे इंजन को कोई नुकसान नहीं होता। सरकार का कहना है कि E20 से कुछ वाहनों में करीब 3% से 5% तक माइलेज कम हो सकता है, लेकिन यह ईंधन प्रदूषण कम करने, कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता घटाने और किसानों से खरीदे जाने वाले इथेनॉल को बढ़ावा देने में मददगार है। सरकार का यह भी कहना है कि पूरे देश में एक साथ शुद्ध पेट्रोल (Pure Petrol), E10 और E20 जैसे कई प्रकार के ईंधन उपलब्ध कराना व्यावहारिक रूप से कठिन होगा।
इधर, E20 को लेकर लोगों की राय भी बंटी हुई है। हाल में सामने आए एक सर्वे में बड़ी संख्या में वाहन मालिकों ने माइलेज और इंजन प्रदर्शन को लेकर चिंता जताई है। वहीं विशेषज्ञों का कहना है कि नए E20-अनुकूल वाहनों में परेशानी की संभावना कम है, जबकि पुराने वाहनों के मालिकों को अपने वाहन निर्माता की सलाह का पालन करना चाहिए।
अब यह मुद्दा केवल तकनीकी नहीं, बल्कि उपभोक्ता अधिकार, पर्यावरण और ऊर्जा नीति से जुड़ी राष्ट्रीय बहस का विषय बन चुका है।



