मुख्य बातें
- पश्चिम बंगाल विधानसभा में UCC विधेयक पेश होने की संभावना।
- बहुविवाह और बाल विवाह पर सख्त रोक का प्रस्ताव।
- लिव-इन रिलेशनशिप के अनिवार्य पंजीकरण की व्यवस्था।
- महिलाओं को संपत्ति और उत्तराधिकार में समान अधिकार देने पर जोर।
- अनुसूचित जनजातियों को कानून के दायरे से बाहर रखने का प्रस्ताव।
- सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच राजनीतिक टकराव की संभावना।
- UCC के साथ सार्वजनिक सुरक्षा से जुड़ा एक और विधेयक भी पेश किया जा सकता है।
Jharkhand Life News कोलकाता। पश्चिम बंगाल विधानसभा के बजट सत्र में आज समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code – UCC) विधेयक, 2026 पेश किए जाने की संभावना है। यदि यह विधेयक सदन में प्रस्तुत होता है, तो यह राज्य की राजनीति के साथ-साथ राष्ट्रीय स्तर पर भी बड़ी चर्चा का विषय बन सकता है। सरकार का कहना है कि इसका उद्देश्य सभी नागरिकों के लिए विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और पारिवारिक मामलों में समान कानूनी व्यवस्था लागू करना है, जबकि विपक्ष इस पर व्यापक चर्चा और सभी समुदायों से सलाह लेने की मांग कर रहा है।
UCC विधेयक में क्या हो सकते हैं प्रमुख प्रावधान?
प्रस्तावित विधेयक में नागरिक कानूनों को एक समान बनाने पर जोर दिया गया है। प्रमुख बिंदु इस प्रकार हैं—
बहुविवाह और बाल विवाह पर सख्त रोक
विधेयक के अनुसार राज्य में बहुविवाह (Polygamy) और बाल विवाह पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव है। कानून का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई का प्रावधान किया जा सकता है।
लिव-इन रिलेशनशिप का पंजीकरण
लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाले जोड़ों के लिए अपने संबंध का अनिवार्य पंजीकरण कराने का प्रावधान प्रस्तावित है। सरकार का कहना है कि इससे दोनों पक्षों के कानूनी अधिकार सुरक्षित रहेंगे।
विवाह के लिए समान कानूनी व्यवस्था
सभी समुदायों के लिए विवाह से जुड़े नियमों को एक समान बनाने की योजना है, ताकि अलग-अलग व्यक्तिगत कानूनों के स्थान पर एक समान नागरिक व्यवस्था लागू हो सके।
महिलाओं को समान संपत्ति अधिकार
प्रस्तावित कानून में महिलाओं और पुरुषों को पैतृक संपत्ति और उत्तराधिकार में समान अधिकार देने की बात कही गई है। इसे महिला अधिकारों को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।
अनुसूचित जनजातियों को छूट
संविधान के तहत संरक्षित अनुसूचित जनजातियों (Scheduled Tribes) को इस कानून के दायरे से बाहर रखने का प्रस्ताव है।
यदि विधेयक पारित हुआ तो क्या होगा?
यदि विधानसभा से यह विधेयक पारित हो जाता है और आगे की संवैधानिक प्रक्रिया पूरी होती है, तो पश्चिम बंगाल उन राज्यों की सूची में शामिल हो सकता है जहां UCC लागू करने की दिशा में ठोस कदम उठाए गए हैं।
सदन में राजनीतिक टकराव तय

विधेयक को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने हैं। सरकार इसे समान अधिकार और समान कानून की दिशा में बड़ा सुधार बता रही है, जबकि विपक्ष का कहना है कि इतने महत्वपूर्ण कानून को लागू करने से पहले सभी धार्मिक और सामाजिक समूहों से व्यापक चर्चा जरूरी है।
एक और महत्वपूर्ण विधेयक भी संभव
सूत्रों के अनुसार सरकार UCC के साथ ‘पश्चिम बंगाल सार्वजनिक सुरक्षा एवं असामाजिक गतिविधि नियंत्रण विधेयक, 2026′ भी सदन में पेश कर सकती है। इसमें कानून-व्यवस्था और सुरक्षा को लेकर कई सख्त प्रावधान शामिल होने की चर्चा है।
UCC क्या है?
यूनिफॉर्म सिविल कोड (Uniform Civil Code) का अर्थ है कि देश के सभी नागरिकों के लिए विवाह, तलाक, गोद लेना, भरण-पोषण और उत्तराधिकार जैसे नागरिक मामलों में एक समान कानून लागू हो, चाहे उनका धर्म या समुदाय कोई भी हो। यह विषय लंबे समय से राजनीतिक और कानूनी बहस का हिस्सा रहा है।



