Jharkhand Life News: NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की चार्जशीट ने कई बड़े दावे किए हैं। जांच एजेंसी के अनुसार, इस पूरे कथित पेपर लीक नेटवर्क की शुरुआत अक्टूबर 2025 में हुई थी और इसमें NTA के गोपनीय कार्य से जुड़े तीन विषय विशेषज्ञों की अहम भूमिका सामने आई है।
CBI के आरोपपत्र के मुताबिक, NTA के गोपनीय अनुभाग में कार्यरत इन विशेषज्ञों ने अपनी आधिकारिक पहुंच का कथित तौर पर दुरुपयोग करते हुए अलग-अलग विषयों के प्रश्नपत्र बाहर पहुंचाए। जांच एजेंसी का दावा है कि पेपर लीक के लिए सुरक्षा व्यवस्था की कमजोरियों का फायदा उठाया गया।
CBI के अनुसार किन पर क्या आरोप हैं?
- पी. वी. कुलकर्णी (केमिस्ट्री विशेषज्ञ): CBI ने इन्हें कथित मुख्य मास्टरमाइंड बताया है। आरोप है कि इन्होंने रसायन विज्ञान का प्रश्नपत्र लीक किया।
- मनीषा गुरुनाथ मांढरे (बायोलॉजी विशेषज्ञ): जांच एजेंसी के अनुसार, इन्होंने बॉटनी और जूलॉजी से जुड़े प्रश्न बाहर पहुंचाए।
- मनीषा संजय हवलदार (फिजिक्स विशेषज्ञ): CBI का आरोप है कि इन्होंने भौतिकी के प्रश्न लीक किए और बाद में सबूत मिटाने की भी कोशिश की।
पेपर लीक कैसे हुआ?
चार्जशीट के अनुसार, विशेषज्ञों की नियमित तलाशी नहीं होने के कारण वे प्रश्नों को छोटे-छोटे कागजों पर लिखकर या याद करके कार्यालय से बाहर ले जाते थे। बाद में इन प्रश्नों को एक डायरी में संकलित किया गया।
CBI का दावा है कि परीक्षा से पहले पुणे में कुछ छात्रों के लिए विशेष कोचिंग सत्र आयोजित किए गए, जहां कथित रूप से उन्हीं प्रश्नों के उत्तर याद कराए गए। इसके बाद इन सवालों की PDF बनाकर टेलीग्राम समेत अन्य डिजिटल माध्यमों से विभिन्न राज्यों तक पहुंचाई गई।
अन्य आरोपी भी जांच के दायरे में
चार्जशीट में मनीषा वाघमारे पर भी आरोप लगाया गया है कि उन्होंने कथित तौर पर अभ्यर्थियों और उनके अभिभावकों को इस नेटवर्क से जोड़ने का काम किया। CBI के अनुसार, यह पूरा नेटवर्क कई स्तरों पर संचालित हो रहा था।
मामले की वर्तमान स्थिति
NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले में CBI ने विशेष अदालत में आरोपपत्र दाखिल कर दिया है। मामले की सुनवाई जारी है और आरोपियों के खिलाफ कानूनी प्रक्रिया चल रही है। अदालत में अभी आरोपों का अंतिम परीक्षण होना बाकी है और सभी आरोपियों को कानून के तहत अपना पक्ष रखने का अधिकार प्राप्त है।
मुख्य बिंदु
- CBI ने चार्जशीट में NTA के तीन विषय विशेषज्ञों पर गंभीर आरोप लगाए।
- जांच के अनुसार, कथित साजिश अक्टूबर 2025 से शुरू हुई।
- आरोप है कि प्रश्न याद कर और चिट्स के जरिए कार्यालय से बाहर ले जाए गए।
- पुणे में कथित विशेष कोचिंग और टेलीग्राम के जरिए प्रश्न साझा करने का दावा।
- मामला फिलहाल विशेष अदालत में विचाराधीन है।



