पश्चिम बंगाल ने एक बार फिर साबित कर दिया कि यहाँ का मतदाता खामोश जरूर हो सकता है, पर सुस्त नहीं। प्रारंभिक आंकड़ों के अनुसार शाम 7 बजे तक लगभग 91.99% मतदान दर्ज किया गया । झारग्राम (90.53%) और मालदा (89.56%) में सबसे अधिक मतदान हुआ, जबकि कलिम्पोंग में यह लगभग 82% रहा।
पहले चरण में मतदान केंद्रों पर महिलाओं की लंबी कतारें देखी गईं, जो लक्ष्मी भंडार जैसी योजनाओं और बांग्लार मेये के नैरेटिव के बीच की कड़ी मानी जा रही हैं।
2,400 से अधिक केंद्रीय बलों की कंपनियों की तैनाती के बावजूद, कुछ क्षेत्रों में तनाव की स्थिति रही। मुर्शिदाबाद में हुमायूँ कबीर की पार्टी (AUJP) और टीएमसी कार्यकर्ताओं के बीच झड़पें हुईं। आसनसोल में भाजपा उम्मीदवार अग्निमित्रा पॉल की गाड़ी पर पथराव हुआ और कुमारगंज में उम्मीदवार शुभेंदु सरकार के साथ हाथापाई की खबरें आईं।
टीएमसी ने आरोप लगाया कि केंद्रीय बल मतदाताओं को डरा रहे हैं, वहीं भाजपा ने बूथ कैप्चरिंग की कोशिशों की शिकायत चुनाव आयोग से की है।
इस चरण की सबसे हाई-प्रोफाइल सीट पर भारी मतदान हुआ है। यहाँ की लड़ाई सीधे तौर पर अस्मिता बनाम परिवर्तन की धुरी पर टिकी है। चाय बागानों और सिलीगुड़ी कॉरिडोर के इलाकों में मतदान का प्रतिशत यह संकेत देता है कि यहाँ का मतदाता किसी बड़े फैसले की ओर बढ़ रहा है। ऐसा प्रतीत होता है कि भ्रष्टाचार की जाँच (कोयला/भर्ती मामले) और अस्मिता के नारों ने आज के मतदान को प्रभावित किया।
प्रथम चरण के लिए हुए 152 सीटों के मतदान में उत्तर बंगाल के 54 सीटों पर भाजपा का पलड़ा भारी दिख रहा है क्योंकि यहाँ चाय बगान और राजवंशी वोट बैंक इनके साथ मजबूती से खड़ा दिख रहा है। मुर्शिदाबाद और मालदा के 34 सीटों पर मुकाबला त्रिकोणीय है पर टीएमसी की स्थिति यहाँ मजबूत दिख रही है। कांग्रेस की सेंधमारी भाजपा को अनपेक्षित लाभ पहुँचा सकती है। जंगलमहल और मेदनीपुर की 44 सीटों पर कांटे की टक्कर है। मध्य बंगाल और अन्य जगहों की 20 सीटों पर टीएमसी मजबूत स्थिति में है।
भारी मतदान, रुझानों और धरातल की स्थिति को देखते हुए भाजपा को जहाँ 78 से 88 सीटें मिलने की उम्मीद है वहीं तृणमूल कांग्रेस को 62 से 72 सीटें मिलने की उम्मीद है। कांग्रेस और वाम मोर्चा के बीच 2 से 5 सीटों से संतोष करना पड़ सकता है।
महिला मतदाताओं (92% टर्नआउट) ने अगर मेये (बेटी) और योजनाओं के नाम पर वोट दिया है, तो टीएमसी 75 का आंकड़ा पार कर सकती है। 2021 में भी 3,000 से कम अंतर वाली 57 सीटें थीं। आज का 91% मतदान उन सीटों पर किसी भी पक्ष के लिए लॉटरी साबित हो सकता है।
इस 152 सीटों के रण में फिलहाल भाजपा को मामूली बढ़त दिख रही है, जिसका मुख्य कारण उत्तर बंगाल में उनकी मजबूती है। लेकिन टीएमसी ने जिस तरह से अस्मिता की ओट में अपनी घेराबंदी की है, वह परिणाम को किसी भी दिशा में मोड़ सकती है।



