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तुम्हारे पास डॉलर है तो हमारे पास मूर्खता है

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अगर सरकार रुपये के गिरने से चिंतित नहीं है तो इसकी वाजिब वजह है। पूरी दुनिया में डी-डॉलराइजेशन यानी डॉलर का विकल्प ढूंढे जाने की चर्चा है। हमने पहले ही ढूंढ लिया है। न्यू इंडिया के पास डॉलर से ज्यादा मजबूत करेंसी है, जिसका नाम मूर्खता है। ये करेंसी हर वो चीज़ खरीद सकती है, जो रूपया या डॉलर नहीं खरीद सकता।

नरेंद्र मोदी अपने इसी बेशकीमती खजाने पर ताव दे रहे हैं। विदेश मंत्रालय आधिकारिक रूप से इस बात की पुष्टि कर चुका है कि गलवान एपिसोड के बाद चीन कब्जाये गये भारतीय क्षेत्र में निर्माण कर रहा है और कई जगहों के नाम बदले जा चुके हैं।

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लेकिन निंदानाथ खामोश है और चीन को लाल-लाल आंखें दिखाने वाले प्रधानमंत्री ने ये सोचकर अपनी आंखें मूंद ली हैं कि कहीं शी जिनपिंग भस्म ना हो जाये। पड़ोसी शासक की जान बचाने के लिए मोदीजी यह कहकर अपने विदेश मंत्रालय को पहले ही झूठा साबित कर चुके हैं– ना कोई घुसा था ना कोई घुसा है।

ईरान चीन के साथ युआन में ट्रेड कर रहा है लेकिन हमने घरेलू व्यापार के लिए दुनिया की सबसे ताकतवर करेंसी मूर्खता का इस्तेमाल उसी तरह बढ़ाना शुरू कर दिया है, जिस तरह नितिन गडकरी पेट्रोल में एथेनॉल मिलवा रहे हैं। मूर्खता नामक करेंसी इतनी मजबूत है कि इसके ज़रिये चुनाव जीते जा सकते हैं, सत्ता को स्थायी बनाया जा सकता है और ध्वनिमत से तानाशाही भी स्थापित की जा सकती है।

जो बेचारा चीन ना घुसा था और ना घुसा है, उसे मोदीजी अब अंडमान निकोबार में बंदरगाह बनाकर घेरेंगे और जाहिर है यह काम राष्ट्र सेठ गौतम अडानी की मदद के बिना नहीं हो सकता।

अंडमान निकोबार वही द्वीप समूह है, जहाँ 2004 की सूनामी ने बता दिया था कि प्रकृति नाराज़ हो तो क्या कर सकती है। लेकिन यहां सवाल चीन से रक्षा का है और ये रक्षा तभी हो पाएगी जब कई हजार साल में विकसित हुए रेन फॉरेस्ट को उजाड़ा जाएगा।

आधिकारिक तौर पर आठ लाख पेड़ काटे जाएंगे। पर्यावरण से जुड़े संगठनों का कहना है कि यह संख्या एक करोड़ तक हो सकती है। जब भारत पहले से ही आग की भट्टी बन चुका है, ऐसे में इतने बड़े महाविनाश की तैयारी का मतलब क्या है और देश इस बात पर कैसे रियेक्ट करेगा?

कोई रियेक्शन नहीं होगा क्योंकि मोदीजी के पास डॉलर से भी ताकतवर मूर्खता का अक्षय कोष है, जिसे सक्रिय करने के लिए ट्रोल आर्मी छोड़ दी गई है। पिछले दो दिन से ट्रोल आर्मी अलग-अलग स्तर पर सक्रिय है।

सरकार से लाख-दो लाख रुपये की सैलरी पाने वाले थोड़े बड़े ट्रोल भारत के विकास में अडंगा लगाने के लिए गांधी को पानी-पीकर कोस रहे हैं। सैकड़ों वीडियो बनाये जा चुके हैं, जिनमें ये बताया जा रहा है कि अगर अंडमान में अडानी का पोर्ट बन गया तो हम जरूरत प़ड़ने पर चीन के साथ वही कर पाएंगे होर्मुज में ईरान ने अमेरिका के साथ किया।

दो रुपये और पांच रुपये वाले ट्रोल इन वीडियो को आगे बढ़ा रहे हैं और “सत्तर साल में कुछ नहीं हुआ” मार्का पेंशनधारी व्हाट्स एप अंकल मासूम सा सवाल कर रहे हैंं कि काटे गये पेड़ दोबारा भी लगाये जा सकते हैं लेकिन विकास ज्यादा जरूरी है।

अरावली पर्वत श्रृंखला को खोद डालने का लाइसेंस सरकार ने अदालत से पहले ही हासिल कर लिया है। माइनिंग के लिए हसदेव जैसे ना जाने कितने जंगल उजाड़े जा रहे हैं। मूर्ख मंडली आश्वस्त है कि मोदीजी जरूरत पड़ने पर ठेका देकर पहाड़ फिर से खड़े करवा सकते हैं और जंगल दोबारा उगवा सकते है लेकिन विकास काम नहीं रूकना चाहिए।

मूर्खता का अक्षय कोष मोदीजी का थाती है, ईश्वर इसकी रक्षा करें।

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राकेश कायस्थ
राकेश कायस्थ
Media professional by occupation writer by heart

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