नॉर्वे में भारतीय प्रधानमंत्री के प्रेस कांफ्रेंस से भाग खड़े होने का वीडियो पूरी दुनिया भर में वायरल हो रहा है। नरेंद्र मोदी प्रेस के सामने ‘दर्शन देने’ की वैसी ही रस्म निभाने आये थे, जैसा आमतौर पर उनके किसी भी इवेंट में होता है। एक महिला पत्रकार ने पूछा “प्रधानमंत्री जी आप दुनिया के सबसे ज्यादा आज़ाद मीडिया के सवालों के जवाब क्यों नहीं देना चाहते?“
जवाब में जो हुआ उससे करन थापर वाला इंटरव्यू याद आया जहां मोदी ने पहले पानी मांगा था और फिर भर्राये गले से दोस्ती बनी रहे कहकर भागे थे। फर्क इतना था कि मोदी उस समय गुजरात के मुख्यमंत्री थे और अब दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के मुखिया हैं। कम से कम सवाल से भागने के मामले में ही सही मोदी ने जो कंसिस्टेंसी दिखाई है, उसकी प्रशंसा की जानी चाहिए।
लेकिन सवाल बहुत कुत्ती चीज़ है, जो जितना डरता है, उसे उतना ही डराता है। मोदी से पूछा गया सवाल विदेश मंत्रालय के अफसरों पर आकर चिपक गया। प्रेस कांफ्रेंस करने आये विदेश मंत्रालय के अधिकारियों से एक पत्रकार ने पूछ लिया इतने खराब मानवाधिकार रिकॉर्ड को देखते हुए कोई भारत पर भरोसा किस तरह करे।
इसके जवाब में विदेश मंत्रालय के सचिव (पश्चिम) सिबी जॉर्ज ने 17 मिनट तक जो कहा उसके बदले वो मनोज कुमार की फिल्म पूरब पश्चिम का गाना “ है प्रीत जहां की रीत सदा “ बजा देते तो ज्यादा बेहतर होता। सुनकर अच्छा लगा कि जॉर्ज ने कहा कि भारतीय संविधान महान हैं और हम गाँधी के देश के लोग हैं। अगर वे चाहते तो ये भी कह सकते थे कि हम पर भरोसा इसलिए कीजिये क्योंकि भारत में अब दीन दयाल जी का एकात्म मानवतावाद लागू हो चुका है और इसी के तहत यूपी के संत मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ “त्वरित मोक्ष योजना” चला रहे हैं।
विदेश मंत्रालय के सचिव सिबी जॉर्ज के बयान का भाव कुछ वैसा ही है, जैसा अडानी को बचाने से जुड़े सवाल पर अमेरिका यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी का था। उनसे पूछा गया था कि क्या आपने अडानी का मामला रफा-दफा करवाने की बात अमेरिकी राष्ट्रपति से की है। जवाब में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था कि भारत एक महान देश है और हमारी नीति वसुधैव कुटुंबकम की है। जब दो देशों के सर्वोच्च नेता आपस में मिलते हैं तो निजी मामलों पर चर्चा नहीं होती है।
अब ताजा खबर ये है कि अडानी के खिलाफ अमेरिका में भ्रष्टाचार के सारे आरोप वापस ले लिये गये हैं। बदले में भारत के राष्ट्र सेठ ने अमेरिका के विकास के लिए वहां 10 अरब डॉलर के निवेश का एलान किया है। प्रधानमंत्री जी देश से अपील कर रहे हैं कि विदेश मत जाइये क्योंकि डॉलर खर्च होता है और देश की आर्थिक स्थिति खराब है। पांच किलो राशन मुफ्त में पाने वाली जनता करतल ध्वनि से प्रधानमंत्री की अपील का स्वागत कर रही है और राष्ट्र सेठ मजबूत रुपया नहीं बल्कि कमज़ोर डॉलर में दस अरब का दान अमेरिकी अर्थव्यस्था को देने जा रहे हैं।
सवाल बहुत कुत्ती चीज हैं। यहां से नहीं तो वहां से मतलब घूम फिरकर वापस आ ही जाते हैं।



