Jharkhand Life News जिनेवा/पेरिस। यूरोप इस समय अपने इतिहास की सबसे खतरनाक गर्मी की लहर (हीटवेव) का सामना कर रहा है। लगातार बढ़ते तापमान ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, 21 जून के बाद से पूरे यूरोप में भीषण गर्मी के कारण 1,300 से अधिक अतिरिक्त मौतें दर्ज की गई हैं। हालात इतने गंभीर हैं कि WHO ने इस भीषण गर्मी को “साइलेंट किलर” (मौन हत्यारा) करार दिया है।
सबसे अधिक प्रभावित देशों में फ्रांस, स्पेन, जर्मनी, ब्रिटेन, इटली, पोलैंड, चेक गणराज्य और हंगरी शामिल हैं। कई स्थानों पर तापमान 40 से 45 डिग्री सेल्सियस के बीच पहुंच गया है, जो इन देशों के लिए असामान्य और बेहद खतरनाक माना जाता है।

फ्रांस में सबसे ज्यादा मौतें
फ्रांस में हालात सबसे चिंताजनक बने हुए हैं। स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, 24 से 27 जून के बीच लगभग 1,000 अतिरिक्त लोगों की मौत दर्ज की गई है। इनमें अधिकांश 65 वर्ष से अधिक उम्र के बुजुर्ग शामिल हैं। राजधानी पेरिस और आसपास के इलाकों में अस्पतालों पर मरीजों का भारी दबाव है और आपातकालीन सेवाएं लगातार सक्रिय हैं।
कई देशों में टूटा तापमान का रिकॉर्ड
यूरोप के लगभग 19 करोड़ लोगों ने 35 डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक तापमान का सामना किया।
- स्पेन में तापमान 45°C के पार पहुंच गया।
- जर्मनी में 41.5°C तक तापमान दर्ज किया गया।
- ब्रिटेन में जून महीने के दशकों पुराने रिकॉर्ड टूट गए।
- डेनमार्क जैसे सामान्यतः ठंडे देश में भी तापमान 37°C तक पहुंच गया।
- चेक गणराज्य, हंगरी और पोलैंड में भी भीषण गर्मी ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि यूरोप के अधिकांश शहर और भवन इतनी अधिक गर्मी सहने के लिए तैयार नहीं हैं, जिससे लोगों के स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ रहा है।
सड़कें पिघलीं, स्कूल बंद, जंगलों में आग
भीषण गर्मी का असर केवल लोगों की सेहत तक सीमित नहीं है।
- जर्मनी और कुछ अन्य देशों में सड़कों की डामर पिघलने लगी।
- फ्रांस में रेल पटरियों के फैलने से कई ट्रेन सेवाएं प्रभावित हुईं।
- बिजली की मांग बढ़ने से कई इलाकों में पावर ग्रिड पर दबाव देखा गया।
- फ्रांस में 1,300 से अधिक स्कूल बंद किए गए।
- स्पेन, पुर्तगाल और इटली में जंगलों में आग की घटनाएं तेजी से बढ़ी हैं।
- कई क्षेत्रों से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया।

WHO ने क्यों कहा ‘साइलेंट किलर‘?
WHO के महानिदेशक डॉ. टेड्रोस अदनोम घेब्रेयसस ने कहा कि अत्यधिक गर्मी बिना किसी बड़े तूफान या बाढ़ की तरह दिखाई दिए भी हजारों लोगों की जान ले सकती है। इसलिए इसे “साइलेंट किलर” कहा जा रहा है।
उन्होंने बताया कि यूरोप के अधिकांश घर, कार्यालय और स्कूल ठंडे मौसम को ध्यान में रखकर बनाए गए हैं। ऐसे में जब तापमान अचानक 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच जाता है तो लोगों को गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ता है।
अस्पतालों पर बढ़ा दबाव
ब्रिटेन, फ्रांस, इटली और अन्य देशों के अस्पतालों में हीट स्ट्रोक, डिहाइड्रेशन, सांस लेने में तकलीफ और हृदय संबंधी समस्याओं वाले मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। कई अस्पतालों ने अतिरिक्त मेडिकल स्टाफ और आपातकालीन व्यवस्था लागू कर दी है।
भारत में 40°C सामान्य, लेकिन यूरोप में क्यों बन जाता है संकट?
विशेषज्ञों के अनुसार भारत और यूरोप की परिस्थितियां अलग हैं।
- भारत में अधिकांश घर गर्म मौसम को ध्यान में रखकर बनाए जाते हैं।
- यूरोप के भवन ठंड से बचाने के लिए डिजाइन किए गए हैं, जिससे गर्मी अंदर फंस जाती है।
- भारत के लोग लंबे समय से अधिक तापमान के अभ्यस्त हैं, जबकि यूरोप में इतनी गर्मी असामान्य है।
- कई यूरोपीय क्षेत्रों में अधिक नमी के कारण शरीर आसानी से ठंडा नहीं हो पाता, जिससे हीट स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है।
जलवायु परिवर्तन पर फिर बढ़ी चिंता
WHO और जलवायु वैज्ञानिकों का कहना है कि ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन के कारण पहले जो भीषण हीटवेव कई दशकों में एक बार आती थी, अब वह लगभग हर साल देखने को मिल रही है।
विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन पर प्रभावी नियंत्रण नहीं किया गया, तो आने वाले वर्षों में ऐसी चरम मौसम घटनाएं और अधिक गंभीर हो सकती हैं। इसका असर स्वास्थ्य, कृषि, ऊर्जा, परिवहन और अर्थव्यवस्था पर भी पड़ेगा।
मुख्य बातें (Highlights)
- यूरोप में भीषण हीटवेव से 1,300 से अधिक अतिरिक्त मौतें।
- फ्रांस में लगभग 1,000 लोगों की जान गई, अधिकांश बुजुर्ग।
- WHO ने गर्मी को “साइलेंट किलर” बताया।
- 16 देशों में तापमान ने तोड़े पुराने रिकॉर्ड।
- कई जगह 40 से 45 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचा पारा।
- सड़कें पिघलीं, स्कूल बंद हुए और जंगलों में आग फैली।
- अस्पतालों में हीट स्ट्रोक और डिहाइड्रेशन के मरीजों की संख्या बढ़ी।
- जलवायु परिवर्तन को इस भीषण गर्मी का प्रमुख कारण माना जा रहा है।
- विशेषज्ञों ने भविष्य में और अधिक गंभीर हीटवेव की आशंका जताई।



