Jharkhand Life News नई दिल्ली | केंद्र सरकार ने झारखंड और ओडिशा में रेलवे नेटवर्क को मजबूत करने के लिए ₹3,907 करोड़ की दो बड़ी मल्टी-ट्रैकिंग रेल परियोजनाओं को मंजूरी दे दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति (CCEA) की बैठक में यह फैसला लिया गया। इन परियोजनाओं का उद्देश्य रेल क्षमता बढ़ाना, माल ढुलाई को तेज करना और दोनों राज्यों की औद्योगिक व आर्थिक गतिविधियों को नई रफ्तार देना है।
किन परियोजनाओं को मिली मंजूरी?
कैबिनेट की स्वीकृति के बाद रेलवे दो अहम परियोजनाओं पर काम शुरू करेगा।
- पारादीप–हरिदासपुर रेल लाइन का दोहरीकरण (ओडिशा), जिससे पारादीप बंदरगाह तक रेल संपर्क और मजबूत होगा।
- राजखरसावां–डांगोआपोसी रेलखंड पर चौथी लाइन (झारखंड-ओडिशा), जिससे इस व्यस्त रेल मार्ग की क्षमता बढ़ेगी और ट्रेनों का संचालन अधिक सुगम होगा।
इन दोनों परियोजनाओं के तहत करीब 145 किलोमीटर अतिरिक्त रेल ट्रैक विकसित किए जाएंगे।
झारखंड को क्या मिलेगा फायदा?
झारखंड के सरायकेला-खरसावां और पश्चिम सिंहभूम जिले इस परियोजना से सीधे लाभान्वित होंगे। चौथी रेल लाइन बनने से लौह अयस्क, कोयला और अन्य खनिजों का परिवहन तेज होगा। इससे क्षेत्र के उद्योगों को बेहतर रेल सुविधा मिलेगी और मालगाड़ियों की आवाजाही में लगने वाला समय कम होगा।
लाखों लोगों को मिलेगा बेहतर रेल नेटवर्क
सरकार के अनुसार इन परियोजनाओं से झारखंड और ओडिशा के 1,526 गांवों में रहने वाले लगभग 14 लाख लोगों को बेहतर रेल संपर्क का लाभ मिलेगा। इसके साथ ही कई धार्मिक और पर्यटन स्थलों तक पहुंच भी पहले से आसान हो जाएगी।
उद्योग और व्यापार को मिलेगा बढ़ावा
रेल लाइन विस्तार के बाद हर साल करीब 44 मिलियन टन अतिरिक्त माल ढुलाई क्षमता विकसित होगी। इससे स्टील उद्योग, खनन क्षेत्र, बिजली संयंत्र और बंदरगाहों तक कच्चे माल की आपूर्ति अधिक तेज और सुचारु हो सकेगी।
पर्यावरण को भी होगा लाभ
रेल मंत्रालय का अनुमान है कि इन परियोजनाओं के पूरा होने के बाद सड़क मार्ग पर भारी वाहनों की निर्भरता घटेगी। इससे हर वर्ष लगभग 6 करोड़ लीटर ईंधन की बचत होने के साथ 29 करोड़ किलोग्राम कार्बन उत्सर्जन कम होने की संभावना है।
कब तक पूरा होगा काम?
रेल मंत्रालय ने दोनों परियोजनाओं को 2030-31 तक पूरा करने का लक्ष्य तय किया है। परियोजनाएं पूरी होने के बाद झारखंड और ओडिशा में रेल कनेक्टिविटी, औद्योगिक विकास और माल परिवहन व्यवस्था को बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद है।




