✍️ विशेष रिपोर्ट: मनोजित कुमार दास
Jharkhand Life News अंतरराष्ट्रीय डेस्क। पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। होर्मुज जलडमरूमध्य (स्ट्रेट ऑफ होर्मुज) को लेकर बढ़े विवाद के बाद दोनों देशों ने सैन्य कार्रवाई तेज कर दी है। लगातार एयर स्ट्राइक, मिसाइल हमलों और जवाबी कार्रवाई के बीच पूरे क्षेत्र में युद्ध जैसे हालात बन गए हैं। हालांकि, कतर समेत कुछ मध्यस्थ देशों की पहल पर दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संपर्क अभी भी जारी है।
कैसे शुरू हुआ नया विवाद?
जानकारी के अनुसार, होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजर रहे कई व्यापारिक जहाजों पर हमलों के बाद अमेरिका और ईरान के बीच पिछले महीने हुए अंतरिम युद्धविराम समझौते पर संकट गहरा गया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने समझौते को समाप्त मानते हुए ईरान के खिलाफ कड़ी सैन्य और आर्थिक कार्रवाई की घोषणा की।
अमेरिका की बड़ी सैन्य कार्रवाई
तनाव बढ़ने के बाद अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने ईरान के 80 से अधिक सैन्य ठिकानों पर बड़े पैमाने पर हवाई हमले किए। इन हमलों में एयर डिफेंस सिस्टम, मिसाइल डिपो, ड्रोन बेस, नौसैनिक ठिकानों और सैन्य ढांचे को निशाना बनाया गया। बुशहर, क्युशम द्वीप, बंदर अब्बास, सिरीक और राजधानी तेहरान समेत कई इलाकों में विस्फोटों की खबरें सामने आईं। साथ ही अमेरिका ने ईरान के तेल निर्यात पर दोबारा कड़े आर्थिक प्रतिबंध भी लागू कर दिए।
ईरान का जवाब
अमेरिकी हमलों के बाद ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने खाड़ी क्षेत्र में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने का दावा किया। ईरान ने कुवैत, बहरीन, कतर और जॉर्डन में मौजूद अमेरिकी ठिकानों की ओर मिसाइल और ड्रोन दागे। कई मिसाइलों और ड्रोन को वायु रक्षा प्रणाली ने बीच रास्ते में ही मार गिराया। ईरान ने चेतावनी दी है कि यदि अमेरिकी कार्रवाई जारी रही तो होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण और सख्त किया जा सकता है।
क्यों महत्वपूर्ण है होर्मुज जलडमरूमध्य?
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक मार्गों में से एक है। वैश्विक कच्चे तेल और एलएनजी का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। मौजूदा तनाव के कारण जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई है और कई शिपिंग कंपनियां सुरक्षा को लेकर सतर्क हैं। यदि यह मार्ग पूरी तरह बाधित होता है तो वैश्विक तेल बाजार, ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर गंभीर असर पड़ सकता है।
वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अमेरिका और ईरान के बीच तनाव और बढ़ता है तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आ सकता है। इससे भारत सहित तेल आयात करने वाले देशों में महंगाई बढ़ने, शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव आने और वैश्विक आर्थिक गतिविधियों पर दबाव पड़ने की आशंका है।
कूटनीति की उम्मीद अब भी कायम
भले ही दोनों देशों के बीच सैन्य कार्रवाई जारी है, लेकिन कतर और अन्य मध्यस्थ देशों के माध्यम से तकनीकी स्तर पर बातचीत भी चल रही है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय लगातार दोनों देशों से संयम बरतने और कूटनीतिक समाधान निकालने की अपील कर रहा है, ताकि यह संघर्ष पूरे पश्चिम एशिया में बड़े युद्ध का रूप न ले।
फिलहाल स्थिति
पश्चिम एशिया में हालात बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं। अमेरिका और ईरान दोनों ने अपनी सैन्य तैयारियां बढ़ा दी हैं। दुनिया की निगाहें अब इस बात पर टिकी हैं कि आने वाले दिनों में कूटनीतिक प्रयास सफल होते हैं या यह टकराव और अधिक गंभीर रूप लेता है।




