विशेष रिपोर्ट: मनोजित कुमार दास
Jharkhand Life News जयपुर| राजस्थान पुलिस मुख्यालय (PHQ) ने सरकारी कामकाज और आधिकारिक दस्तावेजों में ‘दलित’ शब्द के इस्तेमाल पर रोक लगाने का महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। अब पुलिस विभाग के सभी स्तरों पर केवल संविधान द्वारा मान्यता प्राप्त शब्द “अनुसूचित जाति (Scheduled Caste)” या “अनुसूचित जाति वर्ग” का ही प्रयोग किया जाएगा।
यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है और राज्य के सभी पुलिस अधिकारियों तथा थानों को इसका सख्ती से पालन करने के निर्देश दिए गए हैं।
क्या है नया आदेश?
राजस्थान पुलिस मुख्यालय की ओर से जारी सर्कुलर में कहा गया है कि पुलिस के सभी आधिकारिक दस्तावेजों, रिकॉर्ड और पत्राचार में अब ‘दलित’ शब्द का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा।
इसके स्थान पर केवल “अनुसूचित जाति” या “अनुसूचित जाति वर्ग” शब्द का उपयोग किया जाएगा, क्योंकि यही संविधान और सरकारी रिकॉर्ड में मान्यता प्राप्त आधिकारिक शब्दावली है।
किन दस्तावेजों में लागू होगा यह आदेश?
पुलिस मुख्यालय के निर्देश के अनुसार यह नियम सभी कानूनी और प्रशासनिक दस्तावेजों पर लागू होगा। इनमें शामिल हैं—
- एफआईआर (FIR)
- शिकायत पत्र
- चार्जशीट
- केस डायरी
- पंचनामा
- गिरफ्तारी मेमो (Arrest Memo)
- कस्टडी रिकॉर्ड
- पुलिस रिपोर्ट
- सरकारी फॉर्म
- प्रमाण पत्र
- विभागीय पत्राचार
यानी अब पुलिस विभाग के किसी भी आधिकारिक दस्तावेज में ‘दलित’ शब्द नहीं लिखा जाएगा।
मौखिक बातचीत में भी बरतनी होगी सावधानी
सर्कुलर में केवल लिखित दस्तावेज ही नहीं, बल्कि अधिकारियों को मौखिक संवाद के दौरान भी संवैधानिक शब्दावली का प्रयोग करने की सलाह दी गई है। विभाग का उद्देश्य सरकारी संचार में एक समान और आधिकारिक भाषा सुनिश्चित करना बताया गया है।
आखिर यह फैसला क्यों लिया गया?
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) को शिकायत मिली थी कि पुराने सरकारी निर्देशों और न्यायालय के आदेशों के बावजूद पुलिस रिकॉर्ड में लगातार ‘दलित’ शब्द का उपयोग किया जा रहा था।
इसके बाद मुख्यमंत्री कार्यालय के निर्देश पर पुलिस मुख्यालय ने नया सर्कुलर जारी किया।
इस आदेश में मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ के 2018 के फैसले और राजस्थान सरकार के 16 मार्च 2019 के दिशा-निर्देशों का भी उल्लेख किया गया है, जिनमें सरकारी रिकॉर्ड में संवैधानिक शब्दों के प्रयोग पर जोर दिया गया था।
‘दलित’ और ‘अनुसूचित जाति’ में क्या अंतर है?
यही इस पूरे विवाद का सबसे महत्वपूर्ण पहलू है।
‘अनुसूचित जाति (Scheduled Caste)’ भारत के संविधान में मान्यता प्राप्त आधिकारिक और कानूनी शब्द है। सरकारी दस्तावेजों, भर्ती, आरक्षण और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में इसी शब्द का उपयोग किया जाता है।
वहीं ‘दलित’ एक सामाजिक और राजनीतिक पहचान से जुड़ा शब्द है, जिसका प्रयोग लंबे समय से सामाजिक आंदोलनों, साहित्य और सार्वजनिक विमर्श में होता रहा है। हालांकि यह संविधान में आधिकारिक वर्गीकरण के रूप में दर्ज नहीं है।
इसी आधार पर राजस्थान पुलिस ने अपने आधिकारिक रिकॉर्ड में केवल संवैधानिक शब्दावली अपनाने का निर्णय लिया है।
किन अधिकारियों को भेजा गया आदेश?
यह सर्कुलर राज्य के—
- पुलिस महानिदेशकों (DGP)
- पुलिस आयुक्तों (Commissioners)
- जिला पुलिस अधीक्षकों (SP)
- अतिरिक्त पुलिस अधीक्षकों
- पुलिस उपाधीक्षकों (DSP)
- सभी थाना प्रभारियों (SHO)
को भेजा गया है और आदेश के पालन की जिम्मेदारी तय की गई है।
क्या आम लोग ‘दलित’ शब्द नहीं बोल सकते?
नहीं। यह आदेश केवल राजस्थान पुलिस के आधिकारिक कामकाज, सरकारी रिकॉर्ड और प्रशासनिक पत्राचार पर लागू है।
यह आम नागरिकों, मीडिया, लेखकों या सामाजिक संगठनों द्वारा इस शब्द के प्रयोग पर कोई सामान्य कानूनी प्रतिबंध नहीं लगाता। इसलिए इस आदेश की सीमा को सही संदर्भ में समझना आवश्यक है।
मुख्य बातें (Highlights)
- राजस्थान पुलिस मुख्यालय ने ‘दलित’ शब्द के आधिकारिक इस्तेमाल पर रोक लगाई।
- अब सरकारी रिकॉर्ड में केवल ‘अनुसूचित जाति’ या ‘अनुसूचित जाति वर्ग’ लिखा जाएगा।
- आदेश FIR, चार्जशीट, केस डायरी, सरकारी पत्राचार समेत सभी पुलिस दस्तावेजों पर लागू।
- निर्णय में पुराने न्यायिक आदेशों और सरकारी निर्देशों का हवाला।
- यह आदेश केवल पुलिस विभाग के आधिकारिक कार्यों पर लागू है, आम नागरिकों पर नहीं।




