बहुत अद्भुत समय है। एक आम आदमी के मन में क्या हो सकता है ये आजकल एआई भी बहुत अच्छी तरह जानता है। मैंने सिर्फ ये प्रॉम्प्ट दिया– क्या आप ऐसी वॉशिंग मशीन का इलेस्ट्रेशन बना सकते हैं, जो सबकुछ धो सकता है।
मैंने इसके अलावा और कुछ नहीं कहा और उसने बतौर पहला ड्राफ्ट ये इलेस्ट्रेशन पेश कर दिया। खास बात ये है कि यह एआई एजेंट ग्रोक नहीं है, जो रात-दिन एक्स की राजनीतिक खुराक पर पल रहा है। इलेस्ट्रेशन देखिये और अनुमान समझिये कि हमारे समय का सार्वभौम सत्य क्या है।
जो वॉशिंग मशीन आसाराम और राम रहीम सरीखों की चड्डी तक धो सकती है, वहां व्हाइट कॉलर क्राइम के क्या कहने! ईडी-सीडी से लगे तो दाग तो होते इसलिए कि ये लाउंड्री चलती रही। वैसे चड्डा या पाठक जी टाइप लोग एक्स्ट्रा टू-ए-बी की उम्मीद में यहां आये हैं।
वे भले लोग सोच रहे हैं कि पढ़े-लिखे होने के नाते अनपढ़ों की पार्टी में उनकी बहुत पूछ होगी। उन्हें ये पता ही नहीं कि मेन स्ट्रीम में उठने-बैठने लायक बनने के लिए उन्हें गिरिराज से वर्कशॉप में जाना होगा और हिमंता बिस्वा शर्मा की शार्गिदी करनी होगी।
बड़ा पद बीजेपी में उसी व्यक्ति को मिल सकता है, जो यह साबित कर सके कि वह नरेंद्र मोदी की तरह पढ़ा-लिखा है। राघव चड्ढा सीए हैं। क्या वे साबित कर सकते हैं, उन्होंने पहले एमए किया है और उसके बाद बीए भी किया है। जब हाफिटडिफीट देकर साबित नहीं कर सकते तो फिर मंत्री बनने का ख्बाव देखना भी छोड़ देना चाहिए।




