Jharkhand Life News नई दिल्ली। लद्दाख को संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करने और राज्य का दर्जा देने की मांग को लेकर 26 दिनों से आमरण अनशन पर बैठे पर्यावरणविद् सोनम वांगचुक ने आखिरकार अपना अनशन समाप्त कर दिया। गृह मंत्रालय की ओर से लिखित आश्वासन मिलने के बाद उन्होंने और उनके साथियों ने जूस पीकर व्रत तोड़ा।
क्या हुआ?
सरकार की ओर से गृह मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों और भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा के साथ हुई बैठक के बाद लद्दाख के मुद्दों पर विचार के लिए उच्चाधिकार प्राप्त समिति बनाने का लिखित भरोसा दिया गया। इसके बाद वांगचुक ने अनशन खत्म करने का फैसला लिया।
वांगचुक ने क्या कहा?
सोनम वांगचुक ने कहा कि सरकार का यह कदम स्वागत योग्य है, लेकिन केवल आश्वासन काफी नहीं है। अगर तय समय में मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो आंदोलन का अगला चरण शुरू किया जाएगा।
लद्दाख की प्रमुख मांगें
- संविधान की छठी अनुसूची में शामिल किया जाए।
- लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा मिले।
- स्थानीय युवाओं के रोजगार और भूमि अधिकारों की सुरक्षा हो।
- पर्यावरण और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के लिए विशेष व्यवस्था बने।
अब आगे क्या?
अनशन तो खत्म हो गया है, लेकिन संघर्ष नहीं। अब सबकी नजर इस बात पर है कि सरकार अपने लिखित आश्वासन को कितनी जल्दी जमीन पर उतारती है। यदि कार्रवाई में देरी हुई तो लद्दाख में आंदोलन फिर तेज हो सकता है।




