Jharkhand Life News देवघर। झारखंड के देवघर जिले में स्थित त्रिकूट पहाड़ आज भी रोमांच और प्रकृति प्रेमियों की पहली पसंद बनी हुई है। हैरानी की बात यह है कि यहां का प्रसिद्ध रोपवे पिछले करीब ढाई साल से बंद है, लेकिन इसके बावजूद पर्यटकों की संख्या में कोई खास कमी नहीं आई है। हर दिन सैकड़ों, जबकि छुट्टियों और सावन के दौरान हजारों लोग इस पहाड़ी की ओर रुख कर रहे हैं।
करीब 2470 फीट ऊंची त्रिकूट पहाड़ी अपनी प्राकृतिक सुंदरता, घने जंगलों, पहाड़ी रास्तों और मनोरम दृश्यों के लिए पूरे देश में प्रसिद्ध है। यहां पहुंचने वाले पर्यटक अब रोपवे के बजाय सैकड़ों सीढ़ियां और ट्रेकिंग मार्ग अपनाकर शिखर तक पहुंचते हैं। ऊपर से दिखाई देने वाला देवघर और आसपास के जंगलों का नज़ारा पर्यटकों की सारी थकान पलभर में दूर कर देता है।
रोपवे बंद होने से स्थानीय अर्थव्यवस्था पर असर
त्रिकूट रोपवे कभी देवघर का सबसे बड़ा पर्यटन आकर्षण माना जाता था। रोपवे बंद होने के बाद सबसे अधिक असर स्थानीय दुकानदारों, होटल संचालकों, फोटोग्राफरों, वाहन चालकों और छोटे कारोबारियों पर पड़ा है। उनका कहना है कि पहले बड़ी संख्या में पर्यटक रोपवे का आनंद लेने आते थे, जिससे उनकी अच्छी आमदनी होती थी। अब पर्यटकों की संख्या तो बनी हुई है, लेकिन पहले जैसी रौनक नहीं लौट पाई है।
स्थानीय लोग और पर्यटन व्यवसायी लगातार सरकार से रोपवे को दोबारा शुरू करने की मांग कर रहे हैं। उनका मानना है कि यदि आधुनिक सुरक्षा मानकों के साथ रोपवे का संचालन फिर से शुरू होता है, तो देवघर के पर्यटन को नई उड़ान मिलेगी और हजारों लोगों की आजीविका भी मजबूत होगी।
सावन में बढ़ जाता है रोमांच
श्रावणी मेले के दौरान बाबा बैद्यनाथ धाम आने वाले कई श्रद्धालु त्रिकूट पहाड़ी का भी भ्रमण करते हैं। धार्मिक यात्रा के साथ एडवेंचर और प्राकृतिक सौंदर्य का अनुभव करने के लिए यह स्थान उनकी पसंदीदा मंजिल बन चुका है। सुबह और शाम के समय यहां का मौसम और हरियाली पर्यटकों को विशेष रूप से आकर्षित करती है।
निष्कर्ष
रोपवे बंद होने के बावजूद त्रिकूट पहाड़ी का आकर्षण आज भी बरकरार है। प्राकृतिक सौंदर्य, रोमांचक ट्रेकिंग और धार्मिक पर्यटन का अनूठा संगम इसे देवघर के सबसे खास पर्यटन स्थलों में शामिल करता है। यदि भविष्य में रोपवे फिर से शुरू होता है, तो यह क्षेत्र न केवल पर्यटन बल्कि स्थानीय रोजगार के लिए भी नई उम्मीद लेकर आएगा।



