
- विशेष रिपोर्ट: मनोजित कुमार दास
Jharkhand Life News नई दिल्ली: गरीबों तक पहुंचने वाला सरकारी राशन क्या बीच रास्ते में ही बिक गया? भारतीय खाद्य निगम (FCI) से जुड़ा एक बड़ा मामला सामने आने के बाद सरकार ने कड़ा एक्शन लिया है। पूर्वोत्तर राज्यों के लिए आवंटित सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के चावल की कथित हेराफेरी के आरोप में FCI के कार्यकारी निदेशक (Executive Director) समेत पांच वरिष्ठ अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।
प्रारंभिक जांच में आरोप है कि गरीबों के लिए भेजे गए हजारों टन रियायती चावल को नियमों के विपरीत निजी खरीदारों तक पहुंचाया गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए विभागीय कार्रवाई शुरू कर दी गई है और आगे आपराधिक कार्रवाई की भी तैयारी की जा रही है।
क्या है पूरा मामला?
मामला पूर्वोत्तर भारत, विशेष रूप से असम और आसपास के क्षेत्रों के लिए आवंटित PDS चावल से जुड़ा है। शुरुआती जांच के अनुसार करीब 31,000 मीट्रिक टन रियायती चावल को लाभार्थियों तक पहुंचाने के बजाय कथित तौर पर निजी नेटवर्क के जरिए डायवर्ट कर दिया गया।
रिपोर्टों के अनुसार इस पूरे मामले में लगभग ₹143 करोड़ की अनियमितताओं की जांच की जा रही है।
कैसे हुआ कथित घोटाला?
जांच में आरोप है कि सरकारी गोदामों से निकला चावल रिकॉर्ड में तो वितरण दिखाया गया, लेकिन वास्तविक रूप से उसका एक हिस्सा निजी कंपनियों और व्यापारियों तक पहुंच गया।
कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया है कि हरियाणा की एक निजी फर्म को रियायती चावल करीब ₹23.25 प्रति किलोग्राम की दर से बेचे जाने के आरोपों की भी जांच हो रही है। हालांकि इन आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।
किन अधिकारियों पर गिरी गाज?
सरकार ने जिन अधिकारियों को निलंबित किया है, उनमें—
- FCI के कार्यकारी निदेशक (Executive Director)
- एक महाप्रबंधक (GM)
- एक उप महाप्रबंधक (DGM)
- एक सहायक महाप्रबंधक (AGM)
- तथा संबंधित क्षेत्र के अन्य अधिकारी शामिल हैं।
यह कार्रवाई आंतरिक सतर्कता जांच (Vigilance Probe) और उच्च स्तरीय समिति की रिपोर्ट के आधार पर की गई है।
सरकार का सख्त संदेश
खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग और FCI ने संकेत दिया है कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली में भ्रष्टाचार के मामलों में ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाई जाएगी।
सूत्रों के अनुसार, विभागीय कार्रवाई के साथ-साथ यदि जांच में आरोप प्रमाणित होते हैं तो संबंधित अधिकारियों और अन्य आरोपियों के खिलाफ आपराधिक मुकदमे भी दर्ज किए जा सकते हैं।
क्यों है यह मामला बेहद गंभीर?
PDS यानी सार्वजनिक वितरण प्रणाली का उद्देश्य गरीब और जरूरतमंद परिवारों तक रियायती दर पर खाद्यान्न पहुंचाना है। यदि जांच में चावल की कथित हेराफेरी के आरोप सही साबित होते हैं, तो यह केवल आर्थिक अनियमितता नहीं बल्कि करोड़ों गरीबों के अधिकारों से जुड़ा गंभीर मामला माना जाएगा।
अब सभी की नजर इस बात पर है कि जांच एजेंसियां इस मामले में आगे क्या खुलासे करती हैं और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ क्या कार्रवाई होती है।
मुख्य बातें (Highlights)
- पूर्वोत्तर के PDS चावल की कथित हेराफेरी का मामला।
- FCI के Executive Director समेत 5 वरिष्ठ अधिकारी निलंबित।
- करीब 31,000 मीट्रिक टन चावल की जांच।
- लगभग ₹143 करोड़ की अनियमितताओं की पड़ताल।
- सरकार ने विभागीय कार्रवाई शुरू की, आपराधिक जांच की भी तैयारी।



