Jharkhand Life News रांची: झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की परीक्षा में कथित धांधली के मामले में जांच ने बड़ा मोड़ ले लिया है। जांच एजेंसियों ने आयोग की पूर्व सहायक परीक्षा नियंत्रक श्वेता गुप्ता समेत चार लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की है। इन पर प्रश्नपत्र की गोपनीयता भंग करने, परीक्षा प्रक्रिया में अनियमितता और अंकों में कथित हेरफेर से जुड़े गंभीर आरोपों की जांच की जा रही है।
क्या है पूरा मामला?
JPSC परीक्षा परिणाम घोषित होने के बाद कई अभ्यर्थियों और छात्र संगठनों ने चयन प्रक्रिया पर सवाल उठाए थे। आरोप लगाया गया कि एक ही क्रम (सीरियल नंबर) वाले कई अभ्यर्थियों का चयन हुआ, जिससे परीक्षा की निष्पक्षता पर संदेह पैदा हुआ। इसके बाद राज्यभर में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए और निष्पक्ष जांच की मांग तेज हो गई।
जांच में बड़ा खुलासा
मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार ने विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया। जांच के दौरान आयोग के कार्यालय से कई महत्वपूर्ण दस्तावेज, कंप्यूटर हार्ड डिस्क, डिजिटल रिकॉर्ड और OMR शीट जब्त की गई हैं। जांच एजेंसियां अब डिजिटल डेटा और परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े रिकॉर्ड की फोरेंसिक जांच कर रही हैं।
पूर्व अधिकारी समेत चार लोग हिरासत में
जांच के तहत पूर्व सहायक परीक्षा नियंत्रक श्वेता गुप्ता सहित चार संदिग्धों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि परीक्षा की गोपनीय जानकारी कैसे लीक हुई और क्या चयन प्रक्रिया में किसी तरह की मिलीभगत हुई।
विपक्ष ने उठाए सवाल
विपक्षी दलों ने मामले को लेकर राज्य सरकार पर निशाना साधा है। उनका आरोप है कि यदि भर्ती प्रक्रिया में अनियमितता हुई है तो इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। कई नेताओं ने मामले की CBI जांच की मांग भी उठाई है।
अब आगे क्या?
SIT की जांच अभी जारी है। जब्त किए गए डिजिटल साक्ष्यों, OMR शीट और दस्तावेजों की रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं, तो और भी लोगों पर कार्रवाई हो सकती है।




