दिल्ली में CJP आंदोलन पर बवाल, सरकार पर सवालों की बारिश
Jharkhand Life News नई दिल्ली। संसद के मानसून सत्र की शुरुआत के साथ राजधानी दिल्ली एक बार फिर छात्र आंदोलन के केंद्र में आ गई है। CJP (Cockroach Janta Party) के कार्यकर्ताओं ने “संसद चलो” मार्च निकाला, लेकिन संसद तक पहुँचने से पहले ही पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव हो गया। लाठीचार्ज, हिरासत और FIR के बीच सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है—क्या सरकार छात्रों की बात सुनने के बजाय उन्हें दबाने की कोशिश कर रही है?
संसद जाने निकले छात्र पर रास्ते में बरसी लाठियाँ
जंतर-मंतर से शुरू हुआ मार्च संसद मार्ग की ओर बढ़ रहा था। प्रदर्शनकारी शिक्षा व्यवस्था में सुधार, पेपर लीक मामलों में जवाबदेही और केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग कर रहे थे। इसी दौरान पुलिस ने बैरिकेडिंग कर मार्च को रोक दिया और स्थिति तनावपूर्ण हो गई। बाद में पुलिस ने बल प्रयोग किया और कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया। दिल्ली पुलिस ने हिंसा और तोड़फोड़ के आरोप में FIR भी दर्ज की है।
सरकार से बातचीत हुई, लेकिन नतीजा शून्य
केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने CJP प्रतिनिधियों से मुलाकात की। ज्ञापन सौंपा गया, मांगें रखी गईं, लेकिन आंदोलनकारियों का कहना है कि “हमें आश्वासन मिला, समाधान नहीं।” यही वजह है कि संगठन ने धरना जारी रखने का ऐलान किया है।
सबसे बड़ा सवाल: छात्र हिंसक थे या व्यवस्था असहज थी?
सरकार समर्थक इसे कानून-व्यवस्था का मामला बता रहे हैं। लेकिन आंदोलनकारी पूछ रहे हैं:
- अगर मार्च शांतिपूर्ण था तो लाठीचार्ज क्यों?
- अगर बातचीत चल रही थी तो बल प्रयोग की जरूरत क्या थी?
- क्या संसद के बाहर सवाल पूछना अब अपराध बन गया है?
यही वह बिंदु है जहाँ यह आंदोलन सिर्फ छात्रों का नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक अधिकार बनाम सरकारी नियंत्रण की बहस में बदलता दिख रहा है।
सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल ने बढ़ाया दबाव
सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक भी आंदोलन के समर्थन में भूख हड़ताल पर हैं। स्वास्थ्य बिगड़ने पर उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जिसे लेकर समर्थकों ने सरकार पर दबाव बनाने और आंदोलन को कमजोर करने का आरोप लगाया। Reuters
CJP ने पीछे नहीं हटने का ऐलान किया
दिल्ली में हुई झड़पों के बाद संगठन ने कहा है कि फिलहाल बड़े मार्च नहीं निकाले जाएंगे ताकि और लोग घायल न हों, लेकिन धरना और विरोध जारी रहेगा। यानी सरकार को यह संदेश दिया गया है कि आंदोलन दबाया जा सकता है, खत्म नहीं किया जा सकता। Reuters
विपक्ष का हमला: “यह लोकतंत्र नहीं, डर का संदेश है”
राहुल गांधी ने छात्रों पर हुए लाठीचार्ज की आलोचना करते हुए कहा कि युवाओं की आवाज़ को बलपूर्वक दबाना लोकतांत्रिक परंपरा के खिलाफ है। वहीं सरकार समर्थक नेताओं ने आंदोलन के हिंसक स्वरूप पर सवाल उठाए।
निष्कर्ष
“जब छात्र नौकरी, परीक्षा और भविष्य की बात करते हैं तो जवाब में लाठी मिलती है। जब सवाल संसद तक पहुँचने लगते हैं तो बैरिकेड खड़े कर दिए जाते हैं। सरकार कहती है व्यवस्था बचा रहे हैं, लेकिन जनता पूछ रही है—क्या व्यवस्था बचाने के नाम पर आवाज़ें कुचली जा रही हैं?”




