Jharkhand Life News नई दिल्ली। केंद्र सरकार 20 जुलाई से शुरू होने वाले संसद के मॉनसून सत्र में सुप्रीम कोर्ट के जजों की संख्या बढ़ाने से जुड़ा अहम विधेयक पेश करने जा रही है। यदि यह विधेयक संसद से पारित हो जाता है, तो देश की सर्वोच्च अदालत में जजों की कुल संख्या 34 से बढ़कर 38 हो जाएगी।
सरकार इस विधेयक के जरिए मई 2026 में लाए गए अध्यादेश को कानून का रूप देना चाहती है।
क्या है सरकार का प्रस्ताव?
सरकार ‘सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन विधेयक, 2026’ संसद में पेश करेगी।
विधेयक के लागू होने के बाद—
- मुख्य न्यायाधीश (CJI) को छोड़कर जजों की संख्या 33 से बढ़कर 37 हो जाएगी।
- CJI को मिलाकर सुप्रीम कोर्ट में कुल 38 न्यायाधीश होंगे।
जजों की संख्या बढ़ाने की जरूरत क्यों पड़ी?
सरकार का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट में लगातार बढ़ते मामलों के कारण यह कदम जरूरी हो गया है।
मुख्य वजहें—
- सुप्रीम कोर्ट में 92 हजार से ज्यादा मामले लंबित हैं।
- ई-फाइलिंग बढ़ने से अदालतों का कामकाज काफी बढ़ गया है।
- अधिक जज होने से मामलों की सुनवाई तेजी से होगी।
- बड़ी संवैधानिक पीठों का गठन आसान होगा।
- आम लोगों को जल्दी न्याय मिलने की उम्मीद बढ़ेगी।
अध्यादेश से कानून तक का सफर
मई 2026 में केंद्रीय कैबिनेट ने जजों की संख्या बढ़ाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी।
चूंकि उस समय संसद का सत्र नहीं चल रहा था, इसलिए राष्ट्रपति ने संविधान के अनुच्छेद 123 के तहत अध्यादेश जारी किया।
अब संविधान के नियमों के अनुसार इस अध्यादेश को संसद के दोनों सदनों से पारित कराना जरूरी है। इसी वजह से सरकार इसे मॉनसून सत्र में विधेयक के रूप में पेश करेगी।
कैसे बनेगा कानून?
इस विधेयक को पारित करने के लिए संविधान संशोधन की जरूरत नहीं होगी।
इसे संसद में साधारण बहुमत से पारित किया जा सकता है।
सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या का इतिहास
- 1956 – 11 (CJI सहित)
- 1960 – 14
- 1977 – 18
- 1986 – 26
- 2009 – 31
- 2019 – 34
- 2026 (प्रस्तावित) – 38
इस फैसले से क्या फायदा होगा?
- लंबित मामलों का बोझ कम करने में मदद मिलेगी।
- फैसलों में देरी घट सकती है।
- संवैधानिक मामलों की सुनवाई तेज होगी।
- न्याय व्यवस्था की क्षमता बढ़ेगी।
- आम लोगों को समय पर न्याय मिलने की संभावना मजबूत होगी




