Jharkhand Life News नई दिल्ली: जंतर-मंतर पर चल रहे आंदोलन के बीच प्रसिद्ध शिक्षाविद और पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक का आमरण अनशन अब बेहद गंभीर मोड़ पर पहुंच गया है। 17 दिन से केवल नमक और पानी के सहारे चल रहे इस अनशन ने उनके स्वास्थ्य को लेकर चिंता बढ़ा दी है। इसके बावजूद उन्होंने अपनी मांगों से पीछे हटने के संकेत नहीं दिए हैं।
क्या है पूरा मामला?
नीट (NEET-UG) पेपर लीक मामले को लेकर छात्र संगठन कई दिनों से जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे हैं। सोनम वांगचुक 28 जून से इस आंदोलन के समर्थन में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे हैं।
कैसी है तबीयत?
डॉक्टरों के अनुसार लगातार अनशन का असर अब साफ दिखाई दे रहा है।
- करीब 8.2 किलो वजन कम हो चुका है।
- ब्लड प्रेशर और ब्लड शुगर सामान्य स्तर से नीचे पहुंच गए हैं।
- कमजोरी इतनी बढ़ गई है कि बिना सहारे चलना और लंबे समय तक बोलना मुश्किल हो रहा है।
आंदोलन की मुख्य मांगें
प्रदर्शनकारी सरकार के सामने कई प्रमुख मांगें रख रहे हैं।
- NEET पेपर लीक मामले में जवाबदेही तय हो।
- केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग।
- प्रभावित छात्रों के परिवारों के लिए मुआवजे की मांग।
- लद्दाख को संवैधानिक सुरक्षा और छठी अनुसूची का दर्जा देने पर बातचीत।
20 जुलाई को क्या होगा?
सोनम वांगचुक ने 20 जुलाई को संसद के मानसून सत्र के पहले दिन जंतर-मंतर से संसद तक शांतिपूर्ण मार्च का आह्वान किया है। उन्होंने युवाओं और आम नागरिकों से इसमें शामिल होने की अपील की है।
बढ़ा राजनीतिक दबाव
वांगचुक के गिरते स्वास्थ्य पर कई विपक्षी नेताओं और सार्वजनिक जीवन से जुड़े लोगों ने चिंता जताई है। कुछ नेताओं ने सरकार से बातचीत शुरू करने की अपील की है, जबकि कई लोगों ने वांगचुक से स्वास्थ्य को देखते हुए अनशन समाप्त करने का अनुरोध भी किया है।
सबसे बड़ा सवाल…
सवाल अब सिर्फ एक अनशन का नहीं, बल्कि उस संवाद का है जिसका इंतजार आंदोलनकारी कर रहे हैं। क्या सरकार बातचीत की पहल करेगी, या यह आंदोलन आने वाले दिनों में और बड़ा रूप लेगा? फिलहाल सभी की नजरें 20 जुलाई के प्रस्तावित संसद मार्च और सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं।



