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राम मंदिर चढ़ावा विवाद में जांच तेज: दानपेटी से कथित फर्जी QR कोड तक पहुंची SIT, 8 आरोपी गिरफ्तार, ₹79.85 लाख नकद बरामद, 15 जुलाई को आएगी रिपोर्ट

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Jharkhand Life News अयोध्या। राम मंदिर के चढ़ावे में कथित वित्तीय अनियमितताओं की जांच अब निर्णायक दौर में पहुंच गई है। शुरुआत में मामला केवल दानपेटियों से नकदी गायब होने तक सीमित माना जा रहा था, लेकिन जांच आगे बढ़ने के साथ कथित फर्जी QR कोड, योग केंद्र से बरामद दान बॉक्स, नकदी, विदेशी मुद्रा, सोना-चांदी और ट्रस्ट की वित्तीय व्यवस्था तक इसकी जांच का दायरा बढ़ गया है। उत्तर प्रदेश सरकार ने विशेष जांच दल (SIT) को अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंपने के लिए 15 जुलाई तक का समय दिया है।

महाकुंभ के दौरान गड़बड़ी की आशंका

जांच एजेंसियों का मानना है कि महाकुंभ के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के आने का फायदा उठाकर कथित अनियमितताओं को अंजाम दिया गया हो सकता है। इसी अवधि के दौरान नकद दान के साथ-साथ डिजिटल भुगतान व्यवस्था भी जांच के दायरे में आ गई। हालांकि इस संबंध में अभी तक कोई अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है।

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कथित फर्जी QR कोड बना जांच का सबसे बड़ा बिंदु

जांच में सामने आया कि कुछ स्थानों पर लगे QR कोड की भी जांच की जा रही है। SIT यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि श्रद्धालुओं द्वारा किए गए डिजिटल दान अधिकृत ट्रस्ट खाते में पहुंचे या किसी अन्य खाते में ट्रांसफर हुए। यदि जांच में अनियमितता की पुष्टि होती है तो मामला केवल नकदी चोरी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि डिजिटल माध्यम से चढ़ावे की कथित हेराफेरी का भी रूप ले सकता है।

योग केंद्र से मिला दान बॉक्स

जांच के दौरान आरोपी अविनाश शुक्ला से जुड़े एक योग केंद्र पर छापेमारी में “रामराज्य कोष” लिखा दान बॉक्स बरामद किया गया। इस बॉक्स पर QR कोड लगा हुआ था। पुलिस के अनुसार इसी स्थान से सबसे अधिक नकदी बरामद हुई। अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस केंद्र का इस्तेमाल कथित रूप से चढ़ावे की राशि जमा करने या छिपाने के लिए तो नहीं किया जा रहा था।

अब तक 8 आरोपी गिरफ्तार

इस मामले में पुलिस अब तक कुल 8 आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है—

  • अविनाश शुक्ला
  • अनुकल्प मिश्रा
  • लवकुश मिश्रा
  • करुणेश पांडेय
  • मनीष कुमार यादव
  • रामाशंकर मिश्रा
  • सुभाष श्रीवास्तव
  • रामाशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव

किस आरोपी के पास से कितनी नकदी मिली?

जांच एजेंसियों के अनुसार अब तक की बरामदगी इस प्रकार है—

  • अविनाश शुक्ला – ₹20.39 लाख
  • करुणेश पांडेय – ₹18.07 लाख
  • अनुकल्प मिश्रा – ₹16.82 लाख
  • लवकुश मिश्रा – ₹14.25 लाख
  • रामाशंकर मिश्रा – ₹7.32 लाख
  • रामाशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव – ₹1 लाख

कुल बरामद नकदी: ₹79.85 लाख

इसके अलावा पुलिस ने 11 ग्राम सोना, करीब 375 ग्राम चांदी और 1,121 अमेरिकी डॉलर भी बरामद किए हैं। बरामद सामान की जांच कर उसके स्रोत और उपयोग की जानकारी जुटाई जा रही है।

ट्रस्ट की कार्यप्रणाली भी जांच के घेरे में

SIT अब केवल कर्मचारियों की भूमिका तक सीमित नहीं है। जांच में ट्रस्ट की वित्तीय व्यवस्था, बैंकिंग प्रक्रिया, दान राशि के प्रबंधन, प्रशासनिक निर्णयों और नियमों के पालन की भी समीक्षा की जा रही है। ट्रस्ट के महासचिव चम्पत राय, ट्रस्टी अनिल मिश्रा और कोषाध्यक्ष गोविंद देवगिरि से जुड़े प्रशासनिक पहलुओं की भी जांच की जा रही है। हालांकि अभी तक किसी वरिष्ठ पदाधिकारी के खिलाफ कोई आपराधिक आरोप सिद्ध नहीं हुआ है।

चम्पत राय के इस्तीफे के बाद बढ़ी राजनीतिक हलचल

मामले के सामने आने के बाद ट्रस्ट के महासचिव चम्पत राय ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। पूछताछ के दौरान उन्होंने शिकायत दर्ज कराने में हुई देरी को अपनी गलती बताया था। इसके बाद से इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है।

400 निजी सुरक्षाकर्मी भी जांच के दायरे में

जांच एजेंसियां मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था की भी समीक्षा कर रही हैं। करीब 400 निजी सुरक्षाकर्मियों की तैनाती, उनकी जिम्मेदारियों और निगरानी व्यवस्था की जांच की जा रही है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि कथित अनियमितताओं के दौरान कहीं सुरक्षा में चूक या मिलीभगत तो नहीं हुई।

रामगोपाल यादव ने लगाए बड़े आरोप

समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता रामगोपाल यादव ने दावा किया है कि मामला केवल चोरी तक सीमित नहीं बल्कि हजारों करोड़ रुपये के कथित घोटाले से जुड़ा हो सकता है। उन्होंने मंदिर में चढ़ाए गए सोना, चांदी और अन्य बहुमूल्य दान की भी निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। हालांकि उनके इन आरोपों की अभी तक किसी जांच एजेंसी ने आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।

आस्था और पारदर्शिता दोनों की परीक्षा

राम मंदिर देशभर के करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। ऐसे में चढ़ावे से जुड़ी किसी भी प्रकार की अनियमितता का असर केवल आर्थिक नहीं बल्कि लोगों के विश्वास पर भी पड़ सकता है। यही कारण है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की मांग लगातार उठ रही है।

अब 15 जुलाई का इंतजार

अब सभी की निगाहें 15 जुलाई पर टिकी हैं, जब SIT अपनी अंतिम रिपोर्ट उत्तर प्रदेश सरकार को सौंपेगी। इस रिपोर्ट से यह स्पष्ट हो सकेगा कि कथित अनियमितताएं केवल कुछ कर्मचारियों तक सीमित थीं या जांच में किसी बड़े नेटवर्क अथवा अन्य जिम्मेदार लोगों की भूमिका भी सामने आती है।


अस्वीकरण: यह समाचार पुलिस, एसआईटी, सरकारी अधिकारियों और सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी के आधार पर तैयार किया गया है। सभी आरोप जांच के अधीन हैं। किसी भी व्यक्ति की कानूनी जिम्मेदारी का अंतिम निर्णय न्यायालय और जांच एजेंसियों की अंतिम रिपोर्ट के बाद ही होगा।

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