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विशेष

Kriti Verma 13/12/2021 :
बलि देने वाले बकरों के अनुपयोगी चीजों से बनेगी बिजली:रजरप्पा में मां छिन्नमस्तिका का मंदिर परिसर होगा रौशन, चढ़ावे के फूल-पत्तियों से बनेंगी अगरबत्तियां
 
इसके तहत मंदिर परिसर में कुल 72 लाख रुपये की लागत से 3 अलग-अलग प्लांट की स्थापना की जाएगी। इसमें मिथिनेशन प्लांट,सेमी ऑटोमैटिक स्लॉटर हाउस तथा अरगबत्ती प्रोसेसिंग यूनिट शामिल है। यह कार्य योजना अगले 1 वर्ष में जमीनी स्तर पर काम करने लगेगी।

झारखंड के रामगढ़ जिले के रजरप्पा में स्थित मां छिन्नमस्तिका के मंदिर की चकाचौंध को और अधिक व्यवस्थित रूप देने की तैयारी है। इसके लिए बलि के बकरों के अपशिष्ट का इस्तेमाल किया जाएगा। रामगढ़ जिला प्रशासन की ओर से 3 महीने तक कराए गए अध्ययन के बाद तैयार की गई रिपोर्ट में दावा किया गया है कि बलि के अपशिष्ट से हर दिन इतनी बिजली तैयार की जा सकेगी, जिससे मंदिर परिसर जगमगाता रहेगा। 

इसके तहत मंदिर परिसर में कुल 72 लाख रुपये की लागत से 3 अलग-अलग प्लांट की स्थापना की जाएगी। इसमें मिथिनेशन प्लांट,सेमी ऑटोमैटिक स्लॉटर हाउस तथा अरगबत्ती प्रोसेसिंग यूनिट शामिल है।
रामगढ़ की उपायुक्त माधवी मिश्रा की ओर से तैयार कराई गई यह कार्य योजना अगले 1 वर्ष में जमीनी स्तर पर काम करने लगेगी।

 भैरवी और दामोदर के संगम पर स्थित रजरप्पा मंदिर देश-विदेश में हर दिन हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं का आगमन होता है। इस सिद्धपीठ की बड़ी ख्याति है। यहां अपनी मुराद पूरी होने पर श्रद्धालु बकरे की बलि चढ़ाते हैं। रोजाना करीब 200 बकरों की बलि होती है। इसमें करीब 900 किलो अपशिष्ट निकलता है। अब तक यह सारा अपशिष्ट नदी में प्रवाहित होता रहा है। बलि के बाद बकरों को नदी के किनारे ले जाकर धुला जाता है। 

इस प्रक्रिया में मंदिर से नदी के रास्ते में खून फैलता है। इससे आम श्रद्धालुओं को आवागमन में परेशानी होती है। इसके अलावा नदी के जल पर इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। अब तक बलि देने की यह पूरी प्रक्रिया मंदिर के पुजारियों की देखरेख में संपन्न कराई जाती है।

नई कार्ययोजना के अनुसार जिला प्रशासन अब मंदिर की सुविधाओं व व्यवस्थाओं को विश्वस्तरीय बनाना चाहती है। इसके लिए बकरों की बलि, मंदिर में माता को चढ़ने फूलों के प्रबंधन के लिए विस्तृत योजना तैयार की गई है। इसके तहत बलि के लिए आने वाले बकरों की पहले टैगिंग की जाएगी। भक्तों को टोकन दिया जाएगा। इसके बाद बकरों को बलि के लिए ले जाया जाएगा। जहां बलि देने के बाद अपशिष्ट को अलग कर बाकी प्रसाद भक्तों को दे दिया जाएगा। अपशिष्ट से मीथेन गैस तैयार की जाएगी। इससे बिजली की जरुरतें पूरी करने के साथ-साथ मंदिर में रसोई गैस का काम हो सकेगा।

इसके अलावा फूल-पत्तियों को एक साथ संग्रहित कर अगरबत्ती बनाने में इस्तेमाल किया जाएगा। अर्द्धस्वचालित स्लॉटर हाउस में बलि के बाद बकरे के बेकार हिस्सों को प्लांट में डालकर रोज 23 किलोवॉट बिजली बनाई जाएगी। इससे मंदिर परिसर में लगी स्ट्रीट लाइट जगमग रहेंगी। प्लांट की क्षमता प्रतिदिन एक टन अपशिष्ट इस्तेमाल करने की होगी।

प्रशासन उठाएगा पूरा खर्च
रामगढ़ की उपायुक्त माधवी मिश्रा ने कहा कि झारखंड सरकार की मंशा राज्य के धार्मिक व पर्यटन स्थलों को विकसित करने की है। रजरप्पा में मां छिन्नमस्तिका के दर्शन के लिए देश-दुनिया से लोग आते हैं। लिहाया यहां की व्यवस्था को पूरी तरह हाईटेक बनाया जाएगा। तैयार कराई गई योजना पर आने वाला सारा खर्च जिला प्रशासन वहन करेगा।



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