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विशेष
01/12/2021 :
सरकारी अस्पताल की लापरवाही: प्रसव के लिए अस्पताल पहुंची महिला की मौत, बच्चे को भी नहीं बचा सके डॉक्टर, घटना के बाद ड्यूटी छोड़कर हुए फरार
 
लापरवाही का आलम यह था की महिला के मौत के बाद एक तो डॉक्टर भाग खड़े हुए। प्रसूता की मौत के बाद भी यह देखने का प्रयास किसी ने नहीं किया कि बच्चा पेट में जीवित है अथवा मृत। परिजनों के अनुरोध के बाद भी कोई डॉक्टर ने जांच कर उसके मृत होने की पुष्टि नहीं की.

झारखंड के गुमला जिले में सुरक्षित प्रसव के लिए सदर अस्पताल पहुंची महिला और उसके बच्चे की मौत हो गई। घटना के बाद चिकित्सक ड्यूटी छोड़कर फरार हो गए। महिला के परिजनों ने चिकित्सकों पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए अस्पताल परिसर में जमकर हंगामा किया। पुलिस ने पहुंचकर परिवार वालों को सांत्वना दी। दोषियों के खिलाफ कार्रवाई के आश्वासन के बाद कहीं जाकर विवाद खत्म हुआ।

प्राप्त जाानकारी के अनुसार रायडीह प्रखंड के बरगी डाँड़ निवासी हैदर अली प्रसव पीड़ा होने के बाद अपनी 28 वर्षीय बेटी सोनी खातून को मंगलवार को सुबह करीब 10 बजे साथ लेकर गुमला सदर अस्पताल पहुंचे थे। ड्यूटी में मौजूद चिकित्सक ने सोनी के स्वास्थ्य की जांच की। ऑपरेशन के जरिए प्रसव कराने की बात कही। शाम करीब चार बजे तक इंतजार करने के बाद महिला को ऑपरेशन के लिए OT में ले जाया गया। सोनी की मां सकीरन खातून, मौसी नजीरन खातून व पति अर्जुन खान बाहर खुशखबरी का इंतजार कर रहे थे।

करीब दो घंटे गुजर जाने के बावजूद परिवार को कोई सूचना नहीं मिली। इसके बाद परिवार के लोगों ने महिला का स्वास्थ्य जानने का प्रयास किया। ड्यूटी पर मौजूद नर्स व डॉक्टर उन्हें रोकते रहे।काफी गुहार लगाए जाने के बाद परिवार के लोगों को OT जाने दिया गया।ओटी में पहुंचते ही परिजनों ने देखा कि सोनी की सांस नहीं चल रही थी।उसके नाक में ऑक्सीजन पाइप डाला हुआ था।इसी दौरान उसके पिता हैदर अली ने देखा कि बेटी के शरीर में कोई हरकत नही हो रही। इसके बाद सभी लोग रोने-चिल्लाने लगे। परिवार को रोते हुए देखकर ड्यूटी पर मौजूद चिकित्सक डा. पूनम ने उसे रांची रेफर करने का पर्चा थमा दिया। वहां से चली गई। महिला की मौत के बाद उसके पेट में पल रहे बच्चे के बारे में कोई सूचना नहीं दी।

महिला को मृत तक घोषित नहीं किया गया। इसके बाद शाम छह बजे से रात नौ बजे तक अस्पताल परिसर में हंगामा होता रहा। सोनी के दूसरे रिश्तेदार भी अस्पताल पहुंच गए। हंगामे की सूचना के बाद अस्पताल पहुंचे थाना प्रभारी मनोज कुमार ने परिजनों को समझाया। रात करीब 9 बजे परिजन शव को अपने साथ ले जाने को तैयार हुए।

परिवार वालों का दावा
पिता हैदर अली न ने कहा कि उनकी बेटी बिल्कुल ठीक थी।सोमवार को वह अपने प्रसव का जांच कराने खुद से चलकर रायडीह स्वास्थ्य केंद्र पहुंची थी।जहां उसे गुमला सदर अस्पताल में चेकअप कराने की सलाह दी गई। मंगलवार को बेटी परिजनों के साथ खुद से चलकर अस्प्ताल पहुंची।उसे किसी प्रकार का कोई दिक्कत नहीं था।10 बजे चेकअप के बाद डॉक्टर पूनम शाम चार बजे उसे ऑपरेशन के लिए ले गईं। ऑपरेशन किए बिना ही बेटी को मार दिया।पिता ने कहा कि आखिर क्या हुआ जो बेटी की ऑपरेशन से पहले मौत हो गई ।यह जांच का विषय है।

बेटी की मौत डॉक्टर व अस्प्ताल प्रबंधन की लापरवाही से हुई है। लापरवाही का आलम यह था बेटी की मौत के बाद एक तो डॉक्टर भाग खड़े हुए। प्रसूता की मौत के बाद भी यह देखने का प्रयास किसी ने नहीं किया कि बच्चा पेट में जीवित है अथवा मृत। परिजनों के अनुरोध के बाद भी कोई डॉक्टर ने जांच कर उसके मृत होने की पुष्टि नहीं की। सोनी खातून के दो बच्चे हैं। 8 वर्षीय अरहान खान व 7 वर्षीय अयान वखान का रो रो कर बुरा हाल था।

चिकित्सक का दावा
इस संबंध में डॉक्टर पूनम से पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि महिला को दवा दिए जाने के कारण रिएक्शन हो गया। प्रसूता की स्थिति अचानक बिगड़ गई थी।उसे तत्काल रेफर किया गया था। इसी दौरान उसकी मौत हो गई।परिजनों का आरोप बेबुनियाद है।



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